एनईएसटीएस के शासी निकाय की संरचना
पुनर्गठित शासी निकाय में निम्नलिखित सदस्य होंगे:
- माननीय मंत्री, जनजातीय कार्य मंत्रालय – अध्यक्ष।
- माननीय राज्य मंत्री, जनजातीय कार्य मंत्रालय – सदस्य।
- सचिव, जनजातीय कार्य मंत्रालय – सदस्य।
- संयुक्त सचिव (ईएमआरएस), जनजातीय कार्य मंत्रालय – सदस्य।
- वित्तीय सलाहकार, जनजातीय कार्य मंत्रालय – सदस्य।
- उप महानिदेशक, जनजातीय कार्य मंत्रालय – सदस्य।
- अध्यक्ष, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) – सदस्य।
- निदेशक, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) – सदस्य।
- महानिदेशक, भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई) – सदस्य।
- आयुक्त, नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस) – सदस्य।
- आयुक्त, केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) – सदस्य।
- मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) – सदस्य।
- पाँचवीं अनुसूची वाले राज्यों में से एक प्रधान सचिव/सचिव (जनजातीय विकास/कल्याण) – सदस्य।
- छठी अनुसूची वाले राज्यों में से एक प्रधान सचिव/सचिव (जनजातीय विकास/कल्याण) – सदस्य।
- निदेशक (सामान्य प्रशासन), जनजातीय कार्य मंत्रालय – सदस्य।
- निदेशक (ईएमआरएस), जनजातीय कार्य मंत्रालय – सदस्य।
- आयुक्त, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति छात्र शिक्षा समिति (एनईएसटीएस) – सदस्य एवं संयोजक।
- अपर आयुक्त तथा समिति के पदेन सचिव – सदस्य।
- शासी निकाय की वार्षिक साधारण बैठक वर्ष में एक बार ऐसे समय, तिथि एवं स्थान पर आयोजित की जाएगी, जैसा अध्यक्ष द्वारा निर्धारित किया जाए, ताकि एनईएसटीएस की वार्षिक रिपोर्ट (वार्षिक लेखों सहित) पर विचार किया जा सके।
- तथापि, आवश्यकता पड़ने पर अध्यक्ष द्वारा विशेष बैठकें आहूत की जा सकती हैं।
- शासी निकाय की प्रत्येक बैठक में शासी निकाय के कुल सदस्यों का एक-तिहाई भाग गणपूर्ति (कोरम) का गठन करेगा।
शासी निकाय के कार्य:
- शासी निकाय सामान्यतः एनईएसटीएस के कार्यों की देखरेख करेगा ताकि समिति के ज्ञापन (Memorandum of Association) में वर्णित एनईएसटीएस के उद्देश्यों की प्राप्ति सुनिश्चित की जा सके।
- शासी निकाय समिति/एनईएसटीएस की निधियों के प्रबंधन की निगरानी करेगा तथा वार्षिक लेखों की जांच एवं अनुमोदन करने का अधिकार रखेगा।
- शासी निकाय आवश्यकता अनुसार समय-समय पर एनईएसटीएस के संचालन एवं प्रबंधन हेतु नीतियाँ, नियम एवं विनियम निर्धारित करेगा।
- शासी निकाय को आवश्यकता पड़ने पर एनईएसटीएस की संरचना में परिवर्तन करने का अधिकार होगा।